लावणी छन्द
लावणी छन्द (16-14) ईश्वर पर विश्वास रखें अगर नहीं दिखता ईश्वर तो, समझो मत अस्तित्व नहीं। भक्ति-भाव को झाँको अपने, होगी खुद में कमी कहीं। बिना दूध को मथे जगत में, माखन दिखता कभी नहीं। दूध छोड़कर तब क्या हम सब, माखन ढूँढे और कहीं? हवा जगत में किसने देखा? हमने तो महसूस किया। ईश्वर नहीं जगत में तो फिर, तन को किसने प्राण दिया? मन को किसने देखा जग में? तब क्या मन देह में नहीं। गंध नहीं दिखता फूलों में, फिर क्या ढूँढे और कहीं? गन्ने के भीतर का अब तक, देखा किसने मिठास को? सूरज में किसने डाला है, आखिर ऐसा प्रकाश को? प्यास सभी को लगती है पर, दिखती है क्या प्यास कभी? केवल अनुभव होता है तब, पीते हैं हम नीर सभी।। ईश्वर अगर नहीं होते तो बनते चारों धाम नहीं। धरती पर लोगों के मुख में, होता प्रभु का नाम नहीं। छोड़ कपट-छल इस दुनिया में, ईश्वर पर विश्वास रखें। दर्शन देगा निश्चित ही प्रभु, जारी सदा प्रयास रखें।। -----------00---------- राम कुमार चन्द्र...