दोधक वर्णिक छन्द "श्रीकृष्ण-विनय" हे जगपालक ! कृष्ण-मुरारी। अर्ज सुनो प्रभु हे गिरधारी। याचक मैं अरु तुम हो दाता। हे जग के प्रभु!भाग्य विधाता।। वन्दन है तुझको प्रभ...
(मुक्तक) "जगत में हर काम आसान है" ऐ मनुज! तू क्यों परेशान है? क्यों खोता अपनी पहचान है? तू,काम लगन से गर करे तो जगत में हर काम आसान है।। तेरे भीतर भी तो ज्ञान है। पर तू तजता क्यों अ...
"जब भोर हुआ...." जब भोर हुआ चिड़िया चहकी। तब फूल खिले बगिया महकी। तितली अलि मस्त परागन में। बिखरी किरणें घर-आँगन में।। जब पूर्व दिशा रतनार हुआ। खग वास तजा उड़ व्योम छुआ। ...