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Showing posts from August, 2019

श्रीकृष्ण विनय

दोधक वर्णिक छन्द          "श्रीकृष्ण-विनय" हे जगपालक ! कृष्ण-मुरारी। अर्ज सुनो प्रभु हे गिरधारी। याचक मैं अरु तुम हो दाता। हे जग के प्रभु!भाग्य विधाता।। वन्दन है तुझको प्रभ...

जगत में हर काम आसान है

(मुक्तक)    "जगत में हर काम आसान है" ऐ मनुज! तू क्यों परेशान है? क्यों खोता अपनी पहचान है? तू,काम लगन से गर करे तो जगत में हर काम आसान है।। तेरे भीतर भी तो ज्ञान है। पर तू तजता क्यों अ...

जब भोर हुआ...

          "जब भोर हुआ...." जब भोर हुआ चिड़िया चहकी। तब फूल खिले बगिया महकी। तितली अलि मस्त परागन में। बिखरी किरणें घर-आँगन में।। जब पूर्व दिशा रतनार हुआ। खग वास तजा उड़ व्योम छुआ। जब मारुत शीतल मन्द चला। तब क्यों रहते तरु शांत भला।। धर खाँध किसान चले हल को। गढ़ने जग में अपने कल को। कुछ आस लिए मन में अपने। करने सच खेतन में सपने।। घर-आँगन नार बटोर रही। रज आँगन में अब थोर नहीं। पनिहारिन कुम्भ चली धरके। घर लौट रही जल को भरके।। सुरलोक बराबर प्रात हुआ। सबके मन को परभात छुआ। अति हर्ष हुआ सब लोगन को। मन मोह लिया सबके मन को।। राम कुमार चन्द्रवंशी बेलरगोंदी (छुरिया) जिला-राजनांदगाँव 9179798316 प्रकाशित दैनिक दावा rjn 29/8/2019