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Showing posts from July, 2019

कदर समय के नित करव

(कुंडलियाँ छन्द)          "कदर समय के नित करव" कदर समय के नित करव,किस्मत रहिही साथ। कारज समय रहत करव, आही सब कुछ हाथ। आही सब कुछ हाथ,करम नित हँस के करलौ। कभू न मानौ हार,देह मा हिम्म...

करम झन त्यागो

मुक्तामणि छन्द                 "करम झन त्यागो" करम करव जग में सदा,हिरदे रख खुशहाली। फर मिलही पक्का हवे,आज नहीं ते काली। बिना करम मनखे सदा,दीया जस बिन बाती। कोसत रहिथे भाग नित,...

बरसा हर अब आगे

(सार छन्द)            "बरसा हर अब आगे" बरसा हर अब आगे संगी,बरसा हर अब आगे। आसमान मा करिया-करिया,बादर हर अब छागे। रिमझिम-रिमझिम जल बरसत हे,गरमी अब दुरिहागे। जस दुल्हिन लागत हे पिर...

सुन सुन बादर

(त्रिभंगी छन्द)                 "सुन-सुन बादर" सुन-सुन तैं बादर,ओढ़े चादर,सुत झन ला तैं,घोर-घटा। जंगल-झाड़ी मा,अउ बाड़ी मा,ला दे तैंहर,खूब छटा। नरवा-नदिया मा,अउ तरिया मा,छलके पानी,खे...

उठो-उठो ऐ प्यारे बच्चों

(कुकुंभ छन्द )          "उठो-उठो ऐ प्यारे बच्चों" उठो-उठो ऐ प्यारे बच्चों,बीज कर्म का है बोना। वक़्त तुम्हारे द्वार खड़ा है,अवसर कभी नहीं खोना। धारो मन में आज प्रतिज्ञा,पत्थर को प...

बेरा लहुट नइ आवय

(मुक्तामणि छन्द)           "बेरा लहुट नइ आवय" गिर के पाना पेड़ ले,फिर से जुड़ नइ पावै। तस बेरा के हाल हे,लहुट कभू नइ आवै। आये अवसर खोय ले,भविस कहाँ बन पाथे? पुरखौती धन हर घलो,सदा हाथ ल...

मनखे के करनी के फर

           "मनखे के करनी के फर" मनखे मन के करनी के फर,भोगत सबो परानी हे। सुक्खा परगे असाढ़ सावन,मुश्किल मा जिनगानी हे। मनखे खेलिस विनाश लीला,होरा भूँजिस छानी हे। आज भुँजावत हाव...