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होरी के सन्देश

सरसी छंद --------------- 'होरी के सन्देश' माते हावय धूम फगुनवा,होवत हावय सोर। बाजत हावय ढोल-नगाड़ा,गाँव-सहर के खोर।।1।। गावत हावय झूम-झूम के,सुग्घर फागुन गीत। नाच-नाच के मनखे मन हर,बाँटत हव...