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Showing posts from May, 2019

जग के उल्टा रीत

गीतिका )          जग के उल्टा रीत      ------------------------------- झूठ के कतको गिराहिक,साँच हर बेमोल हे। शांत हावे सत्यवादी,झूठ के बड़ बोल हे। छटपटावत साँच हावे,हाल बड़ बेहाल हे। वाह! कलजुग तोर लीला,झ...

काम करव जाँच के

गीतिका           "काम करव जाँच के"       --------------------------------- राख के बिंसवास अन्तस,बाट जिनगी के चलौ। दूसरा के अन्न-धन ला देख के जी ना जलौ। काम उल्टा कर जगत मा,हाथ पाछू झन मलौ। नित पसीना गार के ज...

सियनहा गोठ

मदिरा सवैया 7×भगण 211+2            सियनहा गोठ --------------------------------------------- घाम लगे न पियास लगे,रतिहा दिन ना बरसात लगे।  मेहनती मनखे ल कभू,उजड़े बगिया न सजात लगे।  लाख सकेल रखे पुरखा,भकला ल कभू न गँवात लगे।  कारज के घटकार ल जी,नित देर न बात बनात लगे।। निर्लज ला फटकार लगा,कतको समझा नइ बात लगे।  लालच जेकर अन्तस हे,जग मा नइ ठोकर खात लगे।  क्रोध हरे अँगरा मन के,जिनगी ल न देर जलात लगे।  अन्तस मा अभिमान रहे,तब देर न मान गँवात लगे।। साँच कहे मनखे जब जी,तब लोगन ला पतियात लगे।  काम अनीत करे तब जी,नइ बात कभू बगरात लगे।  लाख कमा धन ला जग मा, जिनगी भर मान कमात लगे। बात धरे कहलाय सुजानिक,मूरख ला समझात लगे।।           राम कुमार चन्द्रवंशी            बेलरगोंदी (छुरिया)           जिला-राजनांदगाँव          ...

ज्ञान के महता

ज्ञान के महता (प्रकाशित दावा )        (हरिगीतिका )        ज्ञान के महता ------------------------------- संसार मा बिन ज्ञान के तैं लोग ला पशु जान जी। सपना घलो होथे अधूरा,मिल न पावय मान जी। अनपढ़ बना पाथे कहा...

गणतंत्र आगे

प्रकाशित दावा घनाक्षरी             "गणतंत्र आ गे"      ------------------------------- उठो रात हा पहागे,दिन गणतंत्र आगे, गाँव अउ सहर ला चलव सजाव जी। देस-दुनिया हा देखे,हमर ले सब सीखे, घर अँगना मा सब दीया ल ...

करम हर बोलथे

Subject: *हरिगीतिका* करम हर बोलथे (प्रकाशित दावा 8/2/19 (हरिगीतिका) 2212 2212 2212 2212         करम हर बोलथे ------------------------------------ कर्तव्य करथे जेन हर,अधिकार वोला खोजथे। पाथे सदा आदर उही,परहित सदा जे सोचथे। सत्कर्म करथ...

निक कारज त्याग करो मत

Subject: *दुर्मिल सवैया (प्रकाशित दावा) दुर्मिल सवैया 8×सगण 112         निक कारज त्याग करो मत      -------------------------------------- पर के धन देख जलो मत जी,इरखा अउ द्वेष करो मत जी। अधिकार हवे फर मा सबके,विपदा जग देख ड...

आगे बसंत रितु

(राधिका छन्द ) प्रकाशित दावा RJN प्रत्येक चरण में 22 मात्रा (13-9)पर यति। यति के पूर्व व बाद में त्रिकल।चार चरण दो दो चरण तुकांत।             आगे बसंत रितु        ------------------------------ आगे बसंत रितु दे...

कहमुक़री

कहमुक़री√(प्रकाशित) Date: Feb 11, 2019 Subject: कहमुक़री√ शुरू के दू लाइन 16-16 तीसरा 15-17 चौथा 7-8 मात्रा मा सफाई।             "कहमुक़री"      ----------------------------                आमा आवय बसंत रूप ल सजाय। महर-महर वो गजब ममहाय। घ...

हिन्द की तुमको कसम

Subject: हिन्द की तुमको कसम(प्रकाशित दावा ) मधुमालती 2212 2212 =14 मात्राएँ           हिन्द की तुमको कसम            ---------------------------- हे हिन्द फौजी,वीर तुम, हो शब्दभेदी तीर तुम। विक्रम तुम्ही हो,भीम तुम, र...

दीया बोले बानी

Subject: दीया बोले बानी (प्रकाशित) (मनहरण घनाक्षरी)         "दीया बोले बानी" दीया हर बोले बानी,सुन मनखे कहानी, तोर-मोर जिनगानी,गजब समान हे। तन ह दुनो के माटी,फूला झन तैंहा छाती, जिनगी म...

फागुन तिहार आगे

मनहरण घनाक्षरी          फागुन तिहार आगे      -------------------------------- फागुन तिहार आगे,खुशी चारों-खूँट छागे, गाँव-गली धूम लागे,लोग फाग गात हे। बैर-भाव ल भुलाके,ढोल नगाड़ा बजाके, सुर ताल बरोबर,लोग...

निराशा छोड़ मानव

Subject: विधाता (प्रकाशित) विधाता छन्द (मात्रिक) 28 मात्रा 1222 1222 1222 1222        " निराशा छोड़ मानव" ------------------------------------------------------ निराशा छोड़ के मानव,करम संसार मा कर लव। हराना हर विपत ला हे,भुजा मा बल अपन भर लव। भुलावव लक...

पेट भरो मत ठग के

       पेट भरो मत ठग के(प्रकाशित दावा)        सारवती छन्द (तीन भगण अंत गुरु 14 वर्ण)          " पेट भरो मत ठग के" बात सुनो नित लोगन के, बोलव जी सब के मन के। जीयव जी हितवा बन के, देख खिले ह...

वंदना

वंदना (प्रकाशित दावा) (इन्द्रवज्रा छन्द) (तगण तगण जगण अंत 2गुरु11-11वर्ण)                            वन्दना         -------------------- हे शारदा माँ, किरपा करो माँ। सज्ञानता दे, विपदा हरो माँ। सन्...

उठो, उठो

उपेन्द्रवज्रा जगण तगण जगण गुरु गुरु 121 221 121 22 (11-11 वर्ण)               "उठो,उठो" उठो,उठो!भारत के निवासी। उठो,तियागो मन के उदासी। तजो-तजो अन्तस के लचारी। चलो सजालौ अँगना दुवारी।। उठो,उ...

बात बोलो जाँच के

Subject: सीता (वर्णिक)(प्रकाशित दावा)             सीता छन्द (     प्रत्येक पंक्ति 15 वर्ण) (र त म य र) 212 221 222 122 212           बात बोलो जाँच के    ---------------------------------- जिन्दगी के बाट रेंगो,द्वेष ईर्ष्या छोड़ के। लोग ल...

चलो माता के दुवारी

(मनहरण घनाक्षरी)        "चलो माता के दुवारी" सुनो बात संगवारी,चलो जाबो नर-नारी, माता रानी के दुवारी,लगे दरबार हे। शोभा बड़ हे नियारी,हावे बघवा सवारी, हाथ तीरसूल गदा,खप्पर,कटार ह...

किस्मत ला झन कोसो

(सार छन्द ) (16-12मात्रा)         "किस्मत ला झन कोसो" चलनी मा जी दूध दुही के,किस्मत ला झन कोसो। बइठ निकम्मा दुनिया मा जी,ईश्वर ला झन दोसो। मेहनती के सदा सहारा,जग मा ईश्वर होथे। आलस करथ...

गुस्सा कभू करव मत

विष्णुपद छन्द (16-10)         "गुस्सा कभू करव मत" गुस्सा कभू करव मत संगी,गुस्सा बुध खाथे। सहिथे जे हर झेल सबो के,वोला जग भाथे। नत्ता-गुँता सगा-सोदर अउ,घर ला टोराथे। करथे जेहर गुस्सा...

सुरुज देव ले विनती

Date: Apr 15, 2019 Subject: सुरुज देव ले विनती (प्रकाशित दावा) (मधुमालती छन्द) 2212 2212          सुरुज देव ले विनती हावे सुरुज तोला नमन। कमती तपन करलव अपन। लागत कुँआ ला हे नजर। अँगरा बनत हे बाट हर।। पंछी त...

वर दे विधाता

वसन्ततिलका (14वर्ण) त भ ज ज 2गुरु 221 211 121 121 22        "वर दे विधाता" संसार के चलइया सुन ले विधाता। हे तोर मोर जग मा पितु-पूत नाता। दे ज्ञान दान प्रभु जी,कर दे गियाता। संसार मा हवय ना सम तोर दा...

वादा अउ वचन

(कुंडलियाँ)        "वादा अउ वचन" वादा,वचन म भेद हे, सुनलव संगी आज। वादा उपजे होंठ ले, वचन हृदय आवाज। वचन हृदय आवाज, कठिन हे वचन निभाना। पड़गे दशरथ,कर्ण, दुनो ला प्राण गँवाना। वादा ...

फूल अउ काँटा

        फूल अउ काँटा (प्रकाशित दावा )           (कुंडलियाँ)            "फूल अउ काँटा" काँटा ल कहे फूल हा, सुन निर्मोही बात। हिरदे मा धर प्रेम तैं, तभे तोर अवकात। तभे तोर अवकात, हृदय ...

कोंदा

             (कुंडलियाँ )                           "कोंदा" कोंदा ले का पूछना, गुड़ के कइसन स्वाद। कोंदा करही न्याय का? व्यर्थ हवे फरियाद। व्यर्थ हवे फरियाद, न्याय के आशा छोड़ो। ब...

सूती के महता

(कुंडलियाँ)            "सूती के महता" सूती कपड़ा के सुनव, महता हवे कमाल। जानव संगी फायदा, पहिनव सालों-साल। पहिनव सालों-साल, कभू नइ गरमी लागे। सर्दी जेला देख, सदा जी दुरिहा भागे। ...

चार अनमोल रतन

Subject: चार अनमोल रतन (प्रकाशित दावा ) (कुंडलियाँ)        "चार अनमोल रतन" बेटी,तुलसी,पेड़,गउ, हावे जी अनमोल। चारों के संसार मा, नइहे कोनों तोल। नइहे कोनों तोल, सदा जी आदर देवौ। राखव मया-द...

बानी के महता

Subject: बानी के महता √ गीता छन्द 26 मात्रा 2212 2212 2212 221=26          "बानी के महता" सबके सुनव सुनके गुनव,बोलव सदा जी तोल। संसार मा बानी बिना,मनखे कहाँ अनमोल? बानी हँसाथे लोग ला,बानी निभाथे रोल। बान...