होरी के सन्देश

सरसी छंद
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'होरी के सन्देश'
माते हावय धूम फगुनवा,होवत हावय सोर।
बाजत हावय ढोल-नगाड़ा,गाँव-सहर के खोर।।1।।

गावत हावय झूम-झूम के,सुग्घर फागुन गीत।
नाच-नाच के मनखे मन हर,बाँटत हवे पिरीत।।2।।

भेदभाव ला आज भुलाके,खेलत हवे गुलाल।
छोटे-बड़े सबो मन मिलके,देवत हावय ताल।।3।।

मारत हे बालक पिचकारी,जइसे नंदकिशोर।
छाये हावे अलिन-गलिन मा,खुशहाली चहुँओर।।4।।

देथे नित संदेशा होरी,छोड़व जुन्ना बैर।
काम करव सब अइसन संगी,होवय सबके खैर।।5।।

                राम कुमार चन्द्रवंशी
                बेलरगोंदी(छुरिया)
                राजनांदगाँव
                 9179798316

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