श्रीकृष्ण विनय
दोधक वर्णिक छन्द
"श्रीकृष्ण-विनय"
हे जगपालक ! कृष्ण-मुरारी।
अर्ज सुनो प्रभु हे गिरधारी।
याचक मैं अरु तुम हो दाता।
हे जग के प्रभु!भाग्य विधाता।।
वन्दन है तुझको प्रभु मेरा।
दूर करो मम संकट घेरा।
थे जग में हम तो प्रभु हारे।
आस जगी सुन नाम तुम्हारे।।
हूँ जग में सबका ठुकराया।
जीवन में सुख वास न पाया।
खूब सुना महिमा प्रभु तेरी।
दूर करो दुविधा अब मेरी।।
क्रोधित इन्द्र प्रकोप दिखाया।
गोकुल में जब संकट ढाया।
हाथ स्वयं प्रभु पर्वत धारा।
गोकुल को मय गोप उबारा।।
पी विष जोगन भक्तन मीरा।
प्राण दिया विष को कर नीरा।
कंस,अरिष्ठ,बकासुर मारा।
गोकुल को भय मुफ्त सँवारा।।
हे प्रभु जी मत देर लगाओ।
हे जन तारक हाथ बढ़ाओ।
डूब रही मम नाव उबारो।
हूँ शरणागत हे प्रभु तारो।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा RJN 24/8/2019
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