बेरा के गोठ

"बेरा के गोठ"
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चार दिन के जिनगी,राखव सबो संग बंदगी,
काकरो निंदा-चारी ल झन गोठियाव संगी,
कोठ के घलो कान होथे,बदल गेहे जमाना,
हांड़ी के मुँह म परई ल ढाँकबे,
मनखे के मुँह म का ला?
सुन लिही बात तोर हाँ में हाँ मिला दिही,
दूसर करा जाके,बोदरा कस ओसा दिही;
बनत मनखे संग मन-मुटाव करवा दिही,
अपन खांध जोड़ के रेंगही,दूसर ल लड़वा दिही;
कतको हावे तिल के ल ताड़ बनाने वाला;
हांड़ी के मुँह म परई ल ढाँकबे,
मनखे के मुँह म का ला?
संसार म ओकरे जिनगी खुशहाल रही पाथे,
जउन निंदा-चारी ले दुरिहा भागत रहिथे;
जबान के न काटे बर कान,न धरे बर पूछी,
बने-बने म सब झन मोर,बिगड़े म छूछी-मुछी;
निंदा करइया मनखे मन बर केऊ ठन हावे बहाना;
हांड़ी के मुँह म परई ल ढाँकबे,
मनखे के मुँह म का ला?
अपन जइसे समझो सब ल,देवत चलो मान,
पर के निंदा-चारी करके झन करो कुकुर कटान;
सबके भीतरी एक हे आत्मा,सबके एक हे मान,
जउन सब ल अपन समझथे,कहलाथे उही महान;
तेकरे सेती कहिथों संगी,झन पड़ो निंदा के पाला;
हांड़ी के मुँह म परई ल ढाँकबे,
मनखे के मुँह म का ला?

      राम कुमार चन्द्रवंशी
      बेलरगोंदी (छुरिया)
      जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
       9179798316

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