गुस्सा कभू करव मत

विष्णुपद छन्द (16-10)

        "गुस्सा कभू करव मत"

गुस्सा कभू करव मत संगी,गुस्सा बुध खाथे।
सहिथे जे हर झेल सबो के,वोला जग भाथे।
नत्ता-गुँता सगा-सोदर अउ,घर ला टोराथे।
करथे जेहर गुस्सा संगी,पाछू पछताथे।।

खागे दुर्योधन के गुस्सा,कौरव के सेना।
पड़गे संगी गुस्सा मा जी,लेना के देना।
लंका जरगे,रावण मरगे,राज-पाठ खोगे।
गुस्सा जेमन करिन जगत मा,माटी मा सोगे।।

गुस्सा आगी के अँगरा ये,जेहर अपनाथे।
पर ला सदा जराके संगी,खुद हर जर जाथे।
समझावत हँव मानो कहना,गुस्सा ला छोड़ौ।
मया-पिरित के डोरी संगी,जम्मो ले जोड़ौ।।

        राम कुमार चन्द्रवंशी
        बेलरगोंदी (छुरिया)
        जिला-राजनांदगाँव
        9179798316

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