देखो

"देखो"
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कभी रोते को हँसाकर देखो,
गिरे हुए को उठाकर देखो,
कितना सुकून मिलता है,
खुद आजमाकर देखो।

मुसीबत से टकराकर देखो,
सपने को सच बनाकर देखो;
जली रोटियां भी अच्छी लगती है,
मेहनत का खाकर देखो।

सब से प्रेम बढ़ाकर देखो,
मन का भेद भुलाकर देखो;
सम्मान जरूर विराजता है,
चरित्र अपना बनाकर देखो।

भूखे को भोजन खिलाकर देखो,
परहित में समय लगाकर देखो;
दिल से दुआएँ मिलती है,
बिगड़ी किसी का बनाकर देखो।

बोलने से पहले विचारकर देखो,
स्वयं पर बात उतारकर देखो;
हर सुनी बातें सच्ची नहीं होती,
कभी स्वयं सच्चाई निहारकर देखो।

    राम कुमार चन्द्रवंशी
    बेलरगोंदी(छुरिया)
    जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
     9179798316
दैनिक दावा RJN में दिनाँक-13/11/17 को प्रकाशित।

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