फूल और काँटे

फूल और काँटे
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बाग में फूल ने काँटे से कहा-
ऐ काँटे,सुन बात जरा,
आखिर, तू क्यों इतना निर्दयी है?
क्या तेरे पास दिल नहीं है?
कौन अच्छा,कौन बुरा,
पहचानता ही नहीं,
किसी को हँसाना कभी जानता ही नहीं।
काँटा बोला-देख फूल,
बेकार की न बात कर
तुम्हारे खातिर मेरे त्याग को याद कर,
तेरे ही हिफाज़त में मैं सारा जीवन गँवाता हूँ,
लोगों से दिन-रात मैं ही तुझे बचाता हूँ,
मेरे ही कारण तू डाल पर इतराता है,
कोई भी तुझे हाथ नहीं लगाता है,
पर,शायद तुझे पता नहीं,
कि तू क्यों खिला है?
हमें तो जीवन तेरे हिफाज़त के लिए मिला है,
इसीलिए मैं किसी की बातों में न आता हूँ,
कुदरत का सौंपा काम सहर्ष निभाता हूँ,
क्योंकि,
मैं अपने कर्तव्य पर अटल रहने वाला काँटा हूँ।

       राम कुमार चन्द्रवंशी
      बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
9179798316
दैनिक सबेरा-संकेत में 08/01/2016को प्रकाशित।

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