पर्यावरण गीत

"पर्यावरण गीत"
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मत करो रुख के बिनास रे संगी,
             वो तेल हरे हम बाती गा,
काट के रुखवा ल काबर करत हव
            अपन टोंटा म फाँसी गा?
जंगल लागे मधुबन जइसे,
           मधुबन ल तुम काट डरेव,
रुख ल का काटेव तुम संगी,
            हाथ म अपन घाव करेव;
रुख आवे हमर अधार रे संगी,
           जियत-मरत के साथी गा।
काट के रुखवा ल काबर करत हव
            अपन टोंटा म फाँसी गा?
चेत जावव गा बेरा रहत ले,
            धरती के करव सिंगार गा,
बन जाही नहीं ते ये धरती
            जइसे मरुस्थल थार गा;
आही बुढ़ापा हमर रे संगी,
           पाबो घलो नहीं लाठी गा।
काट के रुखवा ल काबर करत हव
            अपन टोंटा म फाँसी गा?
बिरवा लगावौ,रुखवा बनही,
               कहेना ल मोर मान लेवौ,
हमर जीवन ह रुख ले जुड़े हे,
                 बात अहू ल जान लेवौ;
बेरुख भुइयाँ ल करके रे संगी,
               काबर कराथौ हाँसी गा?
काट के रुखवा ल काबर करत हव
             अपन टोंटा म फाँसी गा?

          राम कुमार चन्द्रवंशी
         ग्राम+पोष्ट-बेलरगोंदी (छुरिया)
          जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
प्रकाशित दैनिक दावा RJN दिनांक-16/11/17 को।

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