पर्यावरण गीत
"पर्यावरण गीत"
-------------------------------------------------
मत करो रुख के बिनास रे संगी,
वो तेल हरे हम बाती गा,
काट के रुखवा ल काबर करत हव
अपन टोंटा म फाँसी गा?
जंगल लागे मधुबन जइसे,
मधुबन ल तुम काट डरेव,
रुख ल का काटेव तुम संगी,
हाथ म अपन घाव करेव;
रुख आवे हमर अधार रे संगी,
जियत-मरत के साथी गा।
काट के रुखवा ल काबर करत हव
अपन टोंटा म फाँसी गा?
चेत जावव गा बेरा रहत ले,
धरती के करव सिंगार गा,
बन जाही नहीं ते ये धरती
जइसे मरुस्थल थार गा;
आही बुढ़ापा हमर रे संगी,
पाबो घलो नहीं लाठी गा।
काट के रुखवा ल काबर करत हव
अपन टोंटा म फाँसी गा?
बिरवा लगावौ,रुखवा बनही,
कहेना ल मोर मान लेवौ,
हमर जीवन ह रुख ले जुड़े हे,
बात अहू ल जान लेवौ;
बेरुख भुइयाँ ल करके रे संगी,
काबर कराथौ हाँसी गा?
काट के रुखवा ल काबर करत हव
अपन टोंटा म फाँसी गा?
राम कुमार चन्द्रवंशी
ग्राम+पोष्ट-बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
प्रकाशित दैनिक दावा RJN दिनांक-16/11/17 को।
Comments
Post a Comment