प्लास्टिक चाउर
"प्लास्टिक चाउर"
-----------------------------
मोर परोसी बिहनिया होती
पेट पीरा म रोवत रहय,
प्लास्टिक चाउर खाहे कहिके
मोहल्ला भर के मन कहत रहय;
में सोचेंव,प्लास्टिक चाउर!
प्लास्टिक कइसे चुरही,
पसाये म तो- पसिया घलो नइ निकलही।
तिहारु कथे-नहीं,प्लास्टिक चाउर मिलथे,
भात के लाडू बनाके उदगाबे त उदकथे।
में केहेंव-देख परोसी,
ते काकरो बुध म झन जा,
तहूँ थोरिक दिमाग लगा;
पेट पीरा होवत हे त डॉक्टर करा जा,
बने ढंग ले इलाज़ करा;
सस्ता चीज ले महँगा चीज दुनिया बनाथे,
महँगा चीज ले सस्ता चीज कोन बनाथे?
गड़बड़ चाउर म नहीं,तोर पेट म हे,
कमजोरी दूसर म नहीं,तोर चेत म हे;
पर के कहना ल झन मान,
तहूँ अजमा तहूँ जान;
खाद्य अधिकारी कहत हावे- तवा ल गरम करो,
ओकर उप्पर चाउर रखो,
प्लास्टिक होही त पिघल जाही,
चाउर होही त जर जाही।
अउ एक उपाय हे,बटकी म पानी भरो,
ओ मा फेर चाउर डारो,
प्लास्टिक होही त उफल जाही,
चाउर होही त बुड़ जाही।
परोसी किहिस-सिरतोन केहे,
अभिनेच परखथों,
ला तो ठगिया पानी ल, अजमा के देखथों।
देखिस अजमा के त भरम ओकर टूटगे,
कोटा के चाउर ह पानी म डूबगे;
परख के परोसी ह सच ल जान गे,
बिना डॉक्टर के पेट पीरा माड़ गे;
त काकरो कहेना म कोई भरम झन पालो,
जाँचों,परखो तभे मानो।।
----------------------------------------------
राम कुमार चन्द्रवंशी
ग्राम+पोष्ट-बेलरगोंदी
जिला-राजनांदगाँव (छ.ग.)
9179798316
दिनाँक-07/10/2017 को
दैनिक दावा राजनांदगाँव में प्रकाशित।
Comments
Post a Comment