मनखे जिनगी हे अनमोल
"मनखे जिनगी हे अनमोल"
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ये मनखे जिनगी हे अनमोल,
जगत म ककरो संग झन तोल।
हीरा बरोबर तन के भीतर
लोभ-लालच ल तैंहर झन भर,
तोर करम के लेखा-जोखा,
हावे देखइया बइठे ऊपर;
लेस ले काँटा छल-कपट के
बानी मीठा बोल।
ऊपर उठ के जाति-धरम ले,
देख तैं सब ल एक नज़र से;
लिखते चल तैं अमर कहानी,
जीवन के चार दिन के सफ़र में;
देख के दुर्गम रद्दा ल तैं
मारग सत के न छोड़।
तन माटी ये एक दिन मिटही,
आज नहीं त काली जरही;
आये जइसे,जाना पड़ही,
नेक करम तोर अमर करही;
माया-मोह जस रात चंदैनी,
छुप जाही होवत भोर।
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राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
प्रकाशित दैनिक दावा में दिनाँक-20/11/17
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