दुनिया म धोखा हे
"दुनिया म धोखा हे" *****************************
पाँव-पुट दुनिया म धोखा हे,
काँटा नहीं त रद्दा म गोटा हे;
देखो रे संगी,बचो रे साथी,
मनखे बनगे सुवारथ चाकी,
गहूँ कीरा कस पेरावत गा भरोसा हे;
पाँव-पुट दुनिया म धोखा हे।
पर देख भागत हे मनखे बेढंग गा,
छिन-छिन म गिरगिट कस बदलत हे रंग गा ;
खावत खानी मोर-मोर,
उठे के बेरा कोन तोर?
मनखे,बिना पेंदी के लोटा ये।
पाँव-पुट दुनिया म धोखा हे।।
बेईमानी,पाँखी पा उड़त अगास हे,
पिंजरा म सुआ कस सत ह धंधात हे;
मुँह म राम बगल छुरी,
जइसे गुठलू बोइर भीतरी;
देख,कतिक मनखे आज झूठा हे।
पाँव-पुट दुनिया म धोखा हे।।
जिनगी के रद्दा म सुख कभू दुःख हे,
काँटा के बगरैया जग म बहुत हे;
आवत देख हवा-धुंका,
एती-ओती झनीच लुका,
करत चल मुश्किल के जोखा रे।
पाँव-पुट दुनिया म धोखा हे।। **********************************
राम कुमार चन्द्रवंशी
ग्राम+पोस्ट-बेलरगोंदी
जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
9179798316
दैनिक दावा rjn में 31/10/2017 को प्रकाशित।
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