सपने की बात न बता

"सपने की बात न बता"
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ऐ इंसान,तू मुझे,कोरे सपने की बात न बता,
पहुँच सकूँ अपनी मंजिल तक,
                 ऐसी कोई मुझे राह दिखा।
सपने तो अक्सर जीवन में आते-जाते रहते हैं,
जैसे आसमां के तारें,डूबते और निकलते है;
कर्म बिना यहाँ कुछ नहीं मिलता,
मिटता है मुक़द्दर का भी लिखा;
ऐ इंसान,तू मुझे,कोरे सपने की बात न बता।
सपने तो है कागज की नाव,
         कब डूबेगा,क्या भरोसा है?
सच को त्याग,सपनो में जीना,
              बहुत बड़ा ही धोखा है;
चाहता हूँ जीना यथार्थ जीवन,
           जीने की मुझको कला सिखा;
ऐ इंसान,तू मुझे,कोरे सपने की बात न बता।
ख्वाब देखना बुरा नहीं,
       पर,ख्वाब सच मैं कर सकूँ,
जीवन की गहराई को पास से मैं समझ सकूँ;
न होऊँ कभी हताश जीवन में,
         मुझे,उम्मीदों के प्रकाश दिखा;
ऐ इंसान,तू मुझे,कोरे सपने की बात न बता।
मैं लड़ सकूँ तूफां से डटकर,
          कर्म करूँ मैं भीड़ से हटकर;
वाह! कहे सारी दुनिया,
          बैठूँ न मैं कभी भी थककर;
न मिट सके,न मिटा कोई पाये,
           कर्म ऐसा करना सिखा;
ऐ इंसान,तू मुझे,कोरे सपने की बात न बता।

        राम कुमार चन्द्रवंशी
   ग्राम+पोष्ट-बेलरगोंदी (छुरिया)
     जिला-राजनांदगाँव
प्रकाशित दैनिक दावा RJN में दिनांक-11/11/17

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