न मैं कवि हूँ न कोई लेखक
"न मैं कवि हूँ,न कोई लेखक"
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न मैं कवि हूँ,न कोई लेखक,
पर,लिखने की कोशिश करता हूँ बेशक,
क्योंकि,मुझे पता है-
कि हर प्राणी का जीवन एक कविता है;
फर्क,सिर्फ इतना है कि-
कुछ पढ़ने लायक नहीं,किन्तु, कुछ गीता है;
यह पढ़ने वाले पर निर्भर करता है,
कि वह किस हिस्से को अपनाता है;
गुलाब का काँटा,किसी को बेकार नज़र आता है,
किसी को फूलों का हिफ़ज़ातगार नज़र आता है;
मकड़ी का गिरना देख,कोई हार मान लेता है,
कोई उनका साहस अपनाकर मंजिल पा लेता है;
न मैं ज्ञानी हूँ,न ही अज्ञानी हूँ,
न हासिल है मुझे महारत;
क्योंकि,न मैं कवि हूँ,न कोई लेखक।
संसार में सीखने वाला सबसे सीखता है,
अच्छे का फल अच्छा,बुरे का बुरा होता है;
रोने वाला मानव सोफे पर भी रोता है,
झोपड़ी में मजदुर चैन से सोता है;
आप किनका जीवन स्वीकारेंगे?
किनका नकारेंगे?
मैं दूंगा नहीं अपना मत;
क्योंकि,न मैं कवि हूँ,न कोई लेखक।
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राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
प्रकाशित दिनांक-10/11/17 को दैनिक दावा rjn.में।
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