मुस्कुराकर जी ले
"मुस्कुराकर जी ले"
*********************
हे मानव !
नश्वर शरीर का नुमाईश क्या करना,
सदा मन मुताबिक पाने की
फ़रमाईश क्या करना;
जिंदगी होती है चार दिन की,
फिर,पाँचवे की ख्वाहिश क्या करना?
मन तो सागर है, लहरें तो उठेंगी,
न जाने जीवन में कितनी घटनाएँ घटेंगी;
खोकर,न अधिक दुखी हो,
पाकर, न ज्यादा खुश;
सब तेरे अनुसार नहीं होगा,
तू समयानुसार झुक;
जिंदगी के तजुर्बे उस बुजुर्ग से पूछ,
जो पीया हो जीवन में कड़वी घूँट;
कभी सुख,कभी दुःख,
कुदरत का उसूल है,
जीतता वही है, जो करता कबूल है;
हे मानव !
तू भी हँसकर हर घूँट पी ले,
ख़ुशी हो या गम मुस्कुराकर जी ले।। **********************************
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
02/11/2017 को दैनिक दावा rjn में प्रकाशित।
Comments
Post a Comment