वचन और वादा
"वचन और वादा"
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एक दिन कुछ मित्र मेरे घर आये,
बोले-'वचन और वादा'में
कृपया अंतर बतलाएं।
मैं बोला-देख भाई,
वचन भारतीय आईना है,
'वादा' चाइना है।
वचन आत्मा से देते हैं,
वादा जुबान से,
वही फर्क है दोनों में
जो धरती और आसमान में,
वचन के खातिर राजा दशरथ
अपने प्राण गँवाये,
कुंती को दिया वचन कर्ण सहर्ष निभाये,
किन्तु 'वादा' चाइना मॉल की भांति है,
कब तक चले उनकी न कोई गारंटी है;
चले तो ठीक,नहीं तो ख़राब,
वादा को यूँ ही समझिये आप;
टूट गया तो सॉरी बोलो
चुटकी में गलती माफ़,
इसीलिए विवाह में
'वादा' नहीं, वचन लिए जाते हैं,
साक्षी के तौर पर अग्नि के फेरे लिए जाते हैं,
'वचन' में देने वाले का प्राण है,
किन्तु,वादा करना आसान है,
'वचन' आज भी भारतीय संस्कृति की शान है,
'वादा' आजकल चलती-फिरती दूकान है।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव(छ.ग.)
9179798316
प्रकाशित दैनिक सबेरा-संकेत RJN
दिनांक-23/01/2016
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