प्रीत करना सीख ले

"प्रीत करना सीख ले"
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जीवन में क्या रक्खा है?तू पढ़ ले,लिख ले,
इंसान है तू,इंसान से प्रीत करना सीख ले।
नफरत करने वालों की कमी नहीं यहाँ,
हो सके तो जीवन में नफरत को तू जीत ले;
इंसान है तू,इंसान से प्रीत करना सीख ले।
दबंग,दौलत से मिला सम्मान,
        पानी का बुलबुला ही मान;
बिना तप,परिश्रम के
        पुरे किनके हुए अरमान?
कभी सुख,कभी दुःख का आना
        है कुदरत की रीत में;
इंसान है तू,इंसान से प्रीत करना सीख ले।
कई आये,कई गुजर गए,
          जीवन के पन्ने कोरे छोड़,
क्या रक्खा है जाति-धर्म में?
          मानवता से तू नाता जोड़;
है अवसर तेरे पास अभी,
          बीज रहम के तू सींच ले;
इंसान है तू,इंसान से प्रीत करना सीख ले।
निकाल दे अपने जेहन से
          कि कोई लघु,कोई हस्व है,
हर प्राणी,हर वस्तु का
                संसार में महत्त्व है;
अच्छाई के पथ चलकर
       अपनी अमर कहानी लिख ले;
इंसान है तू,इंसान से प्रीत करना सीख़ ले।।

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            राम कुमार चन्द्रवंशी
            बेलरगोंदी(छुरिया)
            जिला-राजनांदगाँव
            9179798316
दिनाँक-4/12/17 को दावा में प्रकाशित ।

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