बेरा के गोठ

"बेरा के गोठ"
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काकर सही,काकर लबारी,
काकर ल पतियाबे?
काकर गोठ गोठियाबे?
हमर परोसी दुकालू
रोज चिल्लावत हे,
कि मँहगाई बढ़ गे हे,
अउ ओकरे टुरा भट्ठी म
दारू पी के परे हे,
मोर समझ म नइ आइस,
कि टुरा जुगाड़ कहाँ ले करे हे,
दुकालू बिचारा बीड़ी तक ल
दूसर ल माँग के धरे हे;
उंकर घर म गेंव
त मोंगरी मछरी चूरे हे;
मँहगाई जेकर बर बढे हे
तेकर बर बढ़े हे,
परोसी के गोठ ल अउ कतिक गोठियाबे?
आजकल काकर सही,काकर लबारी,
काकर ल पतियाबे?काकर गोठ गोठियाबे?
अंकालू ल दुकालू ह,दुकालू ल अंकालू ह
लबरा बतावत हे,
अउ दुनो के दुनो बराबर
गरीबी-रेखा के चाउर खावत हे,
फरफटी दौड़ावत हे,
दुनो अपन आप ल सही बतावत हे,
बात ल सुनबे त अपने मति छरियाबे;
आजकल काकर सही,काकर लबारी,
काकर ल पतियाबे?काकर गोठ गोठियाबे?
अपन दोष कोई देखय नहीं,
दूसर के ल हाँसत हे,
पर बीमारी के इलाज़ करइया,
अपने खुर्र-खुर्र खाँसत हे;
मनखे ल देखबे त
सब दूसर ल तियारत हे,
काम करइया के दउहा नइ हे,
सब ठाकुरे ठाकुर लागत हे;
बिना सोचे समझे काकर पाछु म जाबे?
आजकल काकर सही,काकर लबारी,
काकर ल पतियाबे?काकर गोठ गोठियाबे?
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         राम कुमार चन्द्रवंशी
         बेलरगोंदी(छुरिया)
         जिला-राजनांदगाँव
दिनाँक-07/08/2017 को क्रांतिकारी संकेत में प्रकाशित।

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