चेहरा
चेहरा
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चेहरे पर क्या नाज करना?
चेहरे पे क्या रखा है?
सुबह का सूरज,
शाम को जरूर ढलता है;
रूप के सहारे जो बटोरते है सुर्खियां,
एक दिन मुरझा जाता है फूलों की तरह;
सँवारना है तो ह्रदय सँवारो,
रिश्ता मजबूत बनता है;
चेहरे पर क्या नाज करना?
चेहरे पे क्या रक्खा है?
याद रखो,चेहरे ने बहुतों को लूटा है,
चेहरे से इंसान को पढ़ना ही तो धोखा है;
चेहरे पर कुछ और
भीतर कुछ और होता है;
चेहरे पर क्या नाज करना?
चेहरे पे क्या रक्खा है?
चेहरा,प्राणी का शो-रूम है,
और हृदय गोदाम,
ह्रदय अगर ख़राब हों तो-
चेहरे का क्या काम?
ह्रदय के खूबसूरत इंसान
सबका दिल जीतता है;
चेहरे पर क्या नाज करना?
चेहरे पे क्या रक्खा है?
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राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179898316
12/12/17 को दैनिक दावा RJN में प्रकाशित।
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