मंत्र सिद्ध अब होने दो

              (ताटंक छंद 16-14)

            मन्त्र सिद्ध अब होने दो

कभी मुफ्त की रोटी खाकर, देश सँवर क्या पाया है?
मेहनतों को कामचोर का, मुकुट सदा पहनाया है।
ताकत नहीं प्रजा को मिलती, कभी मुफ्त की रोटी से।
शून्य हुए हैं अंग हमारे , राजनीति की गोटी से।।

मुफ्त रोटियों की लालच ने, भेद कराया भाई में।
चाह गगन को छूने की थी, गिरे मगर हम खाई में।
जान गए हैं सच्चाई को, कर्मठ ही नभ छूता है।
देश कर्मठों के ही बल पर, पाता सदा गुरूता है।।

प्रजा जहाँ की मेहनती हो, खुशियाँ वहाँ समातीं हैं।
जीवन की सारी सुविधाएं, प्रजा वहाँ की पातीं हैं।
मान्य नहीं है हमको जीना, कंगाली की छाया में।
भुगत रहा है श्रीलंका फँस, मुफ्त जाल की माया में।।

देश सुरक्षित होने पर ही, प्रजा सुरक्षित होती है।
मुफ्त रोटियाँ खाने वाली, प्रजा सदा ही रोती है।
नींद खुली है आज हमारी, बीज कर्म का बोने दो।
देश हमारा सबसे प्यारा, मन्त्र सिद्ध अब होने दो।।

       राम कुमार चन्द्रवंशी
        बेलरगोंदी (छुरिया)
        जिला-राजनांदगाँव(छ. ग.)
         ,9179798316


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