कलजुग

उल्लाला छंद
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          कलजुग
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देखव कलजुग के अदा,अजब-गजब अंदाज हे।
साँच मरत हे भूख मा,झूठा मन के राज हे।।1।।

मनखे,मनखे नइ चिन्हे,सब स्वारथ के मीत हे।
दौलत जेकर पास हे,गावत ओकर गीत हे।।2।।

साँच घलो बेचात हे,पा के सस्ता दाम मा।
अंतर होवत बोल हे,अउ मनखे के काम मा।।3।।

सुख बर जोड़े लोग धन,राखे गठरी बाँध के।
लइका जस घरबुंदिया,खाय कभू ना राँध के।।4।।

रिश्ता छोटे हे इहाँ,धन-दौलत के सामने।
दौलत जब तक साथ हे,रिश्ता-नाता हे बने।।5।।

धन-दौलत माँ-बाप हे,कलजुग मा भगवान हे।
बिन धन-दौलत के इहाँ,होवत ना पहिचान हे।।6।।

                राम कुमार चन्द्रवंशी
                बेलरगोंदी (छुरिया)
                 राजनांदगाँव
                 9179798316

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