नारी

"नारी"
--------------------------
सोई अब नारी नहीं,अबला बेचारी नहीं,
कर रही काम अब,नर के समान है।
ज्ञान और विज्ञान में,देश और जहान में,
जहाँ देखो वहाँ अब,नारियों की शान है।
खेल के मैदान पर,धरा आसमान पर,
बना रही नारियाँ भी,नया कीर्तिमान है।
घर-परिवार,टीवी,रेडियो,अखबार में,
नारियों की बन रही नई पहचान है।
देश की सिपाही बन,लोहा लेती डटकर,
शत्रुओं का तोड़ रही,देखो अभिमान है।
करो मत नारियों की तुलना कभी नर से,
नारियों के आगे नित झुका भगवान है।
------------------------------------------------
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
राजनांदगाँव
9179798316

Comments

Popular posts from this blog

गुस्सा कभू करव मत

वह ही तो इंसान है

बेरा के गोठ