ओ बरखा रानी
"ओ बरखा रानी"
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ओ बरखा रानी,ओ बरखा रानी,
सुत झन बादर ला ओढ़ के,
आगे महीना सावन के अब,
बने बरस दमोर के।
चमकत हे बिजली,गरजत हे बादर,
पवन चलत हे झकझोर के,
रुख-राई के डारा-डारा मन
झूमत हे बईहाँ जोर के।
धरती दाई के छाती जुड़ा दे,
रिमझिम-रिमझिम झोर के,
रेंग जाबो हम अलिन-गलिन मा,
कपडा-लत्ता ला मोड़ के।
चले नगरिहा खेत डहर सब,
खुमरी-कमरा ला ओढ़ के,
खेतहारिन के गीत सुना दे,
नाच देखा दे मोर के।
बुढ़वा तरिया के ला दे जवानी,
विनती हे कर जोड़ के;
तोर भरोसा हमर जीवन हे,
झन जा मुँह ला मोड़ के।।
ओ बरखा रानी,ओ बरखा रानी,
सुत झन बादर ला ओढ़ के,
आगे महीना सावन के अब,
बने बरस दमोर के ।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
राजनांदगाँव
9179798316
प्रकाशित दैनिक देशबन्धु रायपुर दिनाँक-22जुलाई 2018
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