कुमार के दोहे
कुमार के दोहे
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भुइयाँ सुन्ना रुख बिना,तुलसी बिना दुवार।
कोठा सुन्ना गउ बिना,बेटी बिन संसार।।1।।
काटव झन कोई रुख ल,धरती हरा बनाव।
मिलही सब ला फर सदा,बिरवा चलव लगाव।2।।
तुलसी,आँगन मा रहे,मच्छर तीर न आय।
सबला दिन अउ रात मा,ऑक्सीजन पहुँचाय।।3।।
दूध-दही हर गाय के,जग मा हे अनमोल।
धरती के अमरित हरे,संग न ककरो तोल।।4।।
बेटी जे घर मा रहय,घर मा रौनक आय।
मइके अउ ससुराल के,शोभा सदा बढ़ाय।।5।।
जग मा लक्ष्मी तीन हे,नारी,धरती,गाय।
ये तीनों के रूठना,भारी विपदा लाय।।6।।
जब नारी के नैन ले,निकले जल के धार।
पाँव पसारे दुख सदा,बिखरे नित परिवार।।7।।
जब-जब धरती माँ रिसे,जग ल रोस देखाय।
भुइयाँ मा भूकम्प कस,विपदा भारी आय।।8।।
गउ माता के रूठना,बड़ दुखदाई होय।
धरती मा मनखे सदा,दूध-दही बर रोय।।9।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
राजनांदगाँव
दिनाँक-31/01/18 को दैनिक दावा मा प्रकाशित।
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