उल्लाला छंद

उल्लाला छंद
उल्लाला छंद 13-13 3+3+2+3+2=13 या 4+4+3+2=13 प्रत्येक चरण।

बिना बीज ना फर मिलय,बिना पेड़ ना छाँव हा।
बिना करम के ना चलय,जग मा ककरो नाँव हा।

रात अधूरा दिन बिना,सँझा बगैर बिहान हा।
एक-दूसरा के बिना,होवय ना पहिचान हा।।

चाँटी अंडा धर चलय,अपन नवा आवास मा।
समझव दिन बरसात के,हावय बिल्कुल पास मा।।

रूप सँवारे मन नहीं,बगुला भगत कहाय जी,
मन मतंग मारे जउन,भवसागर तर जाय जी।।

बाल पकाये घाम मा,जानय ना कुछु काम ला।
वइसन मनखे हर सदा,बोरे कुल के नाम ला।।

घोर विपत होवय भले,छोड़य ना जे आस ला।
करथे नित परयास गा,छूथे उही अगास ला।

                     राम कुमार चन्द्रवंशी
                     बेलरगोंदी(छुरिया)
                     राजनांदगाँव 9179798316

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