बरखा रानी
बरखा रानी
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बरखा रानी ! बरखा रानी !
अब तो जल बरसाओ,
प्यासी है अति धरती माता,
आकर प्यास बुझाओ।
सूख गए हैं नदी-ताल सब
और वृक्षों की डाली,
तुम बिन है श्रृंगार अधूरा,
धरती की हरियाली;
भूल गया है मोर नाचना,
बादल को गरजाओ,
बरखा रानी ! बरखा रानी !
अब तो जल बरसाओ।
कोयल भूली गीत सुनाना,
अरु मेंढक टर्राना,
बतखें भूली जल-विहार को,
खग-वृन्द चहचहाना;
भौंरे निःशंक सो रहे हैं,
आकर तुम्ही जगाओ,
बरखा रानी! बरखा रानी !
अब तो जल बरसाओ।
तुम बिन सारा जग है सूना,
कैसे करें किसानी?
ताक रहे हैं राह तुम्हारी,
जग के सारे प्राणी;
करो रहम अब बरखा रानी,
हमको ना तरसाओ,
बरखा रानी ! बरखा रानी !
अब तो जल बरसाओ।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
राजनांदगाँव
9179798316
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