संवरेगा निश्चित ही कल
संवरेगा निश्चित ही कल
----------------------------------------
बीत गया सो बीत गया,
रोना नहीं है उनका हल;
चलो,आज ही करो सुकर्म,
संवरेगा निश्चित ही कल।
तूफानों से दूर ना भागो,
कायरता को आज जला दो;
जब तक जीत नहीं जाते तुम,
ताकत अपनी पूरी लगा दो;
डटे रहो,ना हटो लक्ष्य से,
यही है विपदाओं का हल।
चलो,आज ही करो सुकर्म,
संवरेगा निश्चित ही कल।।
ना समझो कमजोर स्वयं को,
अपनी पौरुषता पहचानों;
करो प्रतिज्ञा जीवन में तुम,
भीष्म पितामह सा तुम ठानों;
बजा दो जग में डंका अपनी,
मच जाए चाहे उथल-पुथल।
चलो,आज ही करो सुकर्म,
संवरेगा निश्चित ही कल।।
वीर तुम्ही हो,धीर तुम्ही हो,
जग के रखवाले पीर तुम्ही हो;
बैरी का सिर काटने वाले
लक्ष्य-भेदी तीर तुम्ही हो;
कर्म जो करता है कुदरत में,
मिलता है उन्हें ही फल।
चलो,आज ही करो सुकर्म,
संवरेगा निश्चित ही कल।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
राजनांदगाँव
9179798316
Comments
Post a Comment