आपके शहर में नए हैं

आपके शहर में नये हैं
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आप बदल रही हैं,
    पर आपको विश्वास नही है;
देखो दिल के आईने में
           बात कितनी सही है;
देखिये,ये हम नहीं,
            कुछ लोग कह रहे हैं,
वर्ना हमें पता कहाँ होता,
हम तो आपके शहर में नए हैं।

आजकल आप दिखती नहीं हैं,
               ईद के चाँद बन गईं हैं;
घर से तो निकलना चाहिए,
             अपनों से मिलना चाहिए;
देखिये, ये हम नहीं,
                 कुछ लोग कह रहे हैं,
वर्ना हमें पता कहाँ होता,
          हम तो आपके शहर में नए हैं।

आपको कुछ बोलना चाहिए,
              जुबान तो खोलना चाहिए;
दर्द दिल में रखकर
              क्यों सहन कर रहीं हैं?
देखिये,ये हम नहीं,
                कुछ लोग कह रहे हैं,
वर्ना हमें पता कहाँ होता?
       हम तो आपके शहर में नए हैं।

चारदीवारी में आप घूटकर जी रही हैं,
           क्या यह स्वयं पर अत्याचार नहीं है,
अपनी आत्मा की आवाज
                  आप स्वयं दबा रही हैं;
देखिये,ये हम नहीं,
                  कुछ लोग कह रहे हैं,
वर्ना हमें पता कहाँ होता?
           हम तो आपके शहर में नए हैं।

बेकार है जिंदगी अकेले गुजारना,
        तलबगार के बिना सूरत सँवारना;
जानती हैं आप सब कुछ
               बस नखरे दिखा रही हैं
देखिये,ये हम नहीं,
                   कुछ लोग कह रहे हैं,
वर्ना हमें पता कहाँ होता,
          हम तो आपके शहर में नए हैं।

                राम कुमार चन्द्रवंशी
                बेलरगोंदी (छुरिया)
                 राजनांदगाँव (छ.ग.)
                9179798316

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