सुनो सुनो नारी मन

सुनो-सुनो नारी मन
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सुनो-सुनो नारी मन,छोड़व लाचारी पन,
रानी लक्ष्मी बन आज देखावौ संसार ला।
छोडो बीते बात सब,देखावो औकात अब,
आगू आओ खुद करो,अपन उद्धार ला।।

धरो भाला काटो पाँखी,बैरी के निकालो आँखी,
देख सके पापी झन अब कोई नार ला।
थर-थर काँपे लागे,दुरिहा ले देख भागे,
लुकावै पापी मन हा,सुन ललकार ला।।

रहो मत अब चुप,कहाँ हे चण्डिका रूप?
आवे नहीं कान्हा अब,सुनके चीत्कार ला।
घूमत हे अत्याचारी,लगावत हावे आगी,
करो मत देरी अब,धरो तलवार ला।।

शेरनी के रूप धरो,चलव दहाड़ करो,
असफल करो आज,दुश्मन के वार ला।
करो बैरी मरदन,काट फेंको गरदन,
मिटावव आज तुम धरती के भार ला।।

राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
राजनांदगाँव
9179798316

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