वोटर अउ लोकतंत्र
वोटर अउ लोकतंत्र
-------------------------
नेताजी ला वोट चाही,वोटर ला नोट चाही,
भ्रष्टाचारी मनखे ला देहू जब छूट जी।
सोचो देशवासी मन,राज के निवासी मन,
कइसे लोकतंत्र हा होही मजबूत जी।।
फोकट के खाये बर,हाथ ला लमाये बर,
बनही जब मनखे लालची के दूत जी।
देश होही खाली जब,रहिही कंगाली तब,
कइसे लोकतंत्र हा होही मजबूत जी।।
छोड़ जब ईमान ला,करहू मतदान ला,
लोभी मन ला जनता मानहू सपूत जी।
माथा धरे बइठे मा ,सोच-सोच अँइठे मा,
कइसे लोकतंत्र हा होही मजबूत जी।।
सुनता के बीज बो के,लायक ला वोट दे के,
रुक पाही तभे संगी सरकारी लूट जी।
तभे राम राज आही,लोग के सुराज आही,
बनही लोकतंत्र हा तभे मजबूत जी।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
राजनांदगाँव
9179798316
8 अक्टूबर 2018 को दैनिक भास्कर के 'संगवारी'
अंक में प्रकाशित।
Comments
Post a Comment