दुनिया रंग-रंगीला हे
ये दुनिया रंग रंगीला हे
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ये दुनिया रंग-रंगीला हे।
माया-मोह के ताना-बाना
जस मेकरा के जाला हे;
ये दुनिया रंग रंगीला हे।।
ये दुनिया के हे अजब कहानी,
झूठा के हे कतको संगवारी;
सच्चा के घर खदर के छानी,
चोर बनावे महल-अटारी,
मनखे मन के किसम-किसम के
ये दुनिया मा लीला हे;
ये दुनिया रंग-रंगीला हे।।
नत्ता-गुंता रूपया-पइसा
माया के एक सुतरी ये,
मोहाके मनखे जेकर आघू,
बनके नाचत कठपुतरी हे;
पास मा जेकर धन-दोगानी
ओकरे कुटुंब-कबीला हे;
ये दुनिया रंग-रंगीला हे।।
सच अउ झूठ के ये दुनिया मा
झूठ के कतको लेवइया हे;
दुख होवय चाहे सुख के बेरा,
लोगन सिरिफ खवइया हे;
जउन लुटावै धन ला अपन
ओकरे घर मा मेला हे;
ये दुनिया रंग-रंगीला हे।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव 9179798316
दिनाँक-24/09/2018 को
दैनिक भास्कर बिलासपुर के "संगवारी"अंक मा प्रकाशित।
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