सियनहा सीख
सियनहा सीख
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नौ के नगद बढ़िया,तेरह के उधार ले,
सोच के बैपार करो,डूबे झन लुटिया।
धन के धनवान ले,कंजुसहा इंसान ले,
होथे सदा बड़े संगी,हिरदे के गौंटिया।।
झूठा के मितानी हर,लाथे परेशानी बड़,
भूलो मत बात सदा,राखो नित गँठिया।
दान मिले बछिया ला,बाट मिले टठिया ला,
देखे नइ जाय संगी,बने हे कि घटिया।।
संझौती के पानी अउ बिहनिया के झगरा,
थामे नइ थमे संगी,छोले बड़ छतिया।
महल मा अपमान के खीर पकवान ले,
बने होथे मान भरे,गरीब के कुटिया।।
आगी लगे कुँआ खोदे,नाश होवे तब सोचे,
बने नहीं बात संगी,करे खर्चा रुपिया।
ना तो कोई बेकाम हे,सबो मन के काम हे,
बड़े देख छोटे संग कभू झन अँटिया।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316 17
सितम्बर को दैनिक भास्कर बिलासपुर के
संगवारी अंक में प्रकाशित।
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