देवारी के तियारी
देवारी के तियारी
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उज्जर घर-अँगना,पोतत हावे रंग मा,
मनखे न खाली हे,काम-बुता भारी हे।
नवा-नवा लागत हे,गाँव अउ सहर ह,
लोगन देवारी के,करत तियारी हे।।
सजे हे दुकानदारी,लगे हावे भीड़ भारी,
हाँका पार-पार के,बेंचत बैपारी हे।
छूट दे रिझावत हे,ग्राहक बिसावत हे,
लोगन देवारी के करत तियारी हे।।
करसा,कलौंजी,दीया,लक्ष्मी के मूर्ति बढ़िया,
छांटत बजार मा,जम्मो नर-नारी हे।
नवा-नवा कपड़ा ला,लेवत हे सबो मन,
लोगन देवारी के करत तियारी हे।।
कोई लेवै सोना-चाँदी,कोई झउँहा,टुकना,
रद्दा मा लोगन के भीड़ बड़ भारी हे।
लेवय कोचई-काँदा,कोई हर कुम्हड़ा,
लोगन देवारी के करत तियारी हे।।
लेवत हे टुरा मन,फुलझड़ी अउ बम,
देख फटाका सब खुश बड़ भारी हे,
चकरी,अनारदाना,बिसा घर लावत हे,
लोगन देवारी के करत तियारी हे।।
कोई हर कपाट मा,पेंट ल लगावत हे,
जगमग सबके अँगना-दुवारी हे।
झिलमिल झालर ला कोई ओरमावत हे,
लोगन देवारी के करत तियारी हे।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
दैनिक भास्कर बिलासपुर में 29/10/18 को रायगढ़ एवम् कोरिया में 31/10/18 को प्रकाशित।
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