बोली के महता
छप्पय बोली के महता
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सुनव सबो के बात,करव झन सदा ठिठोली।
तिनका बने पहाड़,सोच के बोलो बोली।
करे तीर कस घाव,जीभ हे खतरा भारी।
मानो कहना मोर,सबो झन नर अउ नारी।
मीठा बानी बोल के,हरियावव जी रीत ला।
आगी हर सितलाय जी,पाके मया-पिरीत ला।
सुनव सबो के बात,सोच के बोलव बोली।
करथे गहरा घाव,जिया मा बनके गोली।।
कड़वा के परिणाम,महाभारत ही होथे।
बिना बिचारे बात,करइया पाछू रोथे।
कड़वा बोली बोल के,होवव झन हलकान जी।
बानी मिश्री घोल के,जीतव सकल जहान जी।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
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