जिनगी के सच


Subject: रोला छंद

           जिनगी के सच
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झूठा हावय शान,ठोंक झन तैंहर छाती।
धन-दौलत परिवार,काम नइ आवय नाती।।

फँसके माया-मोह,खाव झन कभू गुलाटी।
जग मा आये जीव,एक दिन होथे माटी।।

तज दे गरब-गुमान,काम नइ आवय संगी।
जान जगत के साँच,जगत हावय सतरंगी।।

मिटगे रावण कंस,गरब मा राज गँवागे।
होगे कौरव नाश,कूल के जोत बुझागे।।

घर,कुटुंब,परिवार,मान झन तैंहर लाठी।
आही विपदा काल,बोलही बात उराठी।।

जम्मो रिश्तेदार,अंत मा दुरिहा जाही।
सबके मालिक एक,विधाता पार लगाही।।

बोले बात कुमार,नींद अब दूर भगालव।
करके सुग्घर काम,जगत मा नाम कमालव।।

                  राम कुमार चन्द्रवंशी
                  बेलरगोंदी
                  जिला-राजनांदगाँव
                  9179798316
दैनिक भास्कर बिलासपुर,रायगढ़,कोरिया के संगवारी अंक में 26/11/18 को प्रकाशित।

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