दुनिया के सच

(छप्पय)
दुनिया के सच
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दुनिया हरे बजार,सबो मन समझव जानव।
लगे हवय जी भीड़,बाट तुम खोज निकालव।
मया-मोह के जाल,बिछे हे समझव जानव।
बगरे दाना देख,फँसव मत कोई मानव।
सुख मा सब झन तोर हे,विपत काल मा कोन हे?
बाँटत दौलत जउन हे,कहिथे वोला सोन हे।

झूठा हावय शान,गरब जी आज मिटालव।
करव अपन पहिचान,जगत मा नाम कमालव।
आथे जग मा लोग,बोल का हाथ म धरके?
जाथे जग के लोग,चार के खाँध म चढ़के।
धन-दौलत संसार के,अटल कहाँ?दिन चार के।
तज के गरब-गुमान ला,पहिचानव इंसान ला।

                  राम कुमार चन्द्रवंशी
                  बेलरगोंदी
                  जिला-राजनांदगाँव
                  9179798316

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