उठो, उठो
उपेन्द्रवज्रा
जगण तगण जगण गुरु गुरु
121 221 121 22 (11-11 वर्ण)
"उठो,उठो"
उठो,उठो!भारत के निवासी।
उठो,तियागो मन के उदासी।
तजो-तजो अन्तस के लचारी।
चलो सजालौ अँगना दुवारी।।
उठो,उठो ! नाँगर के पुजारी।
चलो सम्हालौ अब कास्तकारी।
उठो,चलो जी हल खाँध धारौ।
उठो-उठो खेतन ला सँवारौ।।
उठो-उठो जी मजदूर भाई।
गिरा पसीना करलौ कमाई।
उठो बँधालौ बल ला नवा जी।
धरौ कुदारी अउ टंगिया जी।।
उठो,उठो जी सब कर्मचारी।
बिहान होगे करलौ तियारी।
तजो-तजो जी मन के खुमारी।
गढ़ो नवा भारत संगवारी।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
Comments
Post a Comment