ज्ञान के महता

ज्ञान के महता (प्रकाशित दावा )
       (हरिगीतिका )

       ज्ञान के महता
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संसार मा बिन ज्ञान के तैं लोग ला पशु जान जी।
सपना घलो होथे अधूरा,मिल न पावय मान जी।
अनपढ़ बना पाथे कहाँ?खुद के कभू पहिचान ला।
पूरा सदा ज्ञानी करै,जीवन म जी अरमान ला।।

ज्ञानी सदा सम्मान पाथे,हर जघा हर देस मा।
पहिचान होवय ना कभू जी जात बोली भेस मा।
तुलसी कबीरा ज्ञान पाके,हे अमर जी आज ले।
करना हवय खुद ला अमर तब,ज्ञान ला जी साज ले।।

ज्ञानी करे शुरुआत कारज,मन म पक्का ठान के। अज्ञान के हर काम होथे,बिन पुछी बिन कान के।
होथे सदा अपमान हर जी साथ मा अज्ञान के।
नित शान आदर बाढ़थे जी,साथ मा विद्वान के।।

           राम कुमार चन्द्रवंशी
           बेलरगोंदी (छुरिया)
            जिला-राजनांदगाँव
            9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा rjn 29/01/2019

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