कोंदा

             (कुंडलियाँ )
          
               "कोंदा"

कोंदा ले का पूछना, गुड़ के कइसन स्वाद।
कोंदा करही न्याय का? व्यर्थ हवे फरियाद।
व्यर्थ हवे फरियाद, न्याय के आशा छोड़ो।
बोल कभू नइ पाय, सदा जी नाता जोड़ो।
बोलय बात 'कुमार' फूलही अँगना गोंदा।
गुस्सा जब जब आय, रहव जी बनके कोंदा।।

कोंदा हर बोलय नहीं, सुनथे सब के बात।
ककरो ले पूछय नहीं, कभू धरम अउ जात।
कभू धरम अउ जात, कलह के कारण बनथे।
आपस के संबंध, बिना मतलब के तनथे।
पर कर घर के बात, बोल के झन तैं भोंदा।
कोंदा ले जी सीख, रास नइ खोलय कोंदा।।

         राम कुमार चन्द्रवंशी
         बेलरगोंदी(छुरिया)
         जिला-राजनांदगाँव
         9179798316

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