पेट भरो मत ठग के
पेट भरो मत ठग के(प्रकाशित दावा)
सारवती छन्द (तीन भगण अंत गुरु 14 वर्ण)
" पेट भरो मत ठग के"
बात सुनो नित लोगन के,
बोलव जी सब के मन के।
जीयव जी हितवा बन के,
देख खिले हिरदे जन के।।
वस्त्र सदा जन नैन जँचे,
भोजन जेन असान पचे।
कारज देख न लोग हँसे,
जीवन मुश्किल मा न फँसे।।
लालच के नइ चीज फले,
फोकट मा जिनगी न चले।
लाख सकेलव माल भले,
आदर,कर्म सही न मिले।।
चार कमावव जीवन मा,
एक लगावव तीन जमा।
रीत इही कहिथे जग के,
पेट भरो मत जी ठग के।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा rjn 02/04/2019
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