आगे बसंत रितु
(राधिका छन्द ) प्रकाशित दावा RJN
प्रत्येक चरण में 22 मात्रा (13-9)पर यति।
यति के पूर्व व बाद में त्रिकल।चार चरण दो दो चरण तुकांत।
आगे बसंत रितु
------------------------------
आगे बसंत रितु देख,मुस्कुरावत हे।
बाग-बगीचा मा फूल,रंग लावत हे।
चिरई चिरगुन के गीत,मन ल भावत हे।
भँवरा सब ला सन्देश,जा सुनावत हे।।
ठुठवा रुख के अब भाग घलो हरियागे।
सुग्घर सरसों के फूल,गजब निक लागे।
परसा,दुल्हिन,आमा ह दुल्हा लागत हे।
कारी कोयलिया गीत मधुर गावत हे।।
आगे बहार अब बाग,अउर परिया मा।
हावय छतराये पाँख,कमल,तरिया मा।
तितली उड़-उड़ के मन ल अब लुभावत हे।
भुइयाँ हर जइसे सरग,नजर आवत हे।।
लोग नगाड़ा अउ ढोल अब बजावत हे।
लइका,बुढ़वा सब फाग गीत गावत हे।
पारा-पारा मा धूम अब मचावत हे।
आगे बसंत रितु लोग करत स्वागत हे।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा Rjn 11/02/19
Comments
Post a Comment