चलो माता के दुवारी

(मनहरण घनाक्षरी)

       "चलो माता के दुवारी"
सुनो बात संगवारी,चलो जाबो नर-नारी,
माता रानी के दुवारी,लगे दरबार हे।
शोभा बड़ हे नियारी,हावे बघवा सवारी,
हाथ तीरसूल गदा,खप्पर,कटार हे।
हवे विराजे पहाड़ी,पहिने हे लाली साड़ी,
माथ बिंदी,कान बाली,गला मोती हार हे।
बाँह ला बहुँटी साजे,गोड़ मा पैजन बाजे,
सोना मा सुहागा माँ के सजे दरबार हे।।

जलत हवय जोती,लागत हे सुरहोती,
जगमग चारों कोती,जोत के कतार हे।
गाँव-गाँव खोर-खोर,देस-दुनिया मा शोर,
लगावत हावे जोर,भक्त जयकार हे।
दरसन आरी-पारी,करत हे नर-नारी,
भगत के बारी-बारी,करत उद्धार हे।
देखे नहीं छोटे-बड़े,भेदभाव नइ करे,
दयालू हे माता रानी,महिमा अपार हे।।

       राम कुमार चन्द्रवंशी
       बेलरगोंदी (छुरिया)
       जिला-राजनांदगाँव
       9179798316

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