कहमुक़री
कहमुक़री√(प्रकाशित) Date: Feb 11, 2019 Subject: कहमुक़री√
शुरू के दू लाइन 16-16 तीसरा 15-17 चौथा 7-8 मात्रा मा सफाई।
"कहमुक़री"
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आमा
आवय बसंत रूप ल सजाय।
महर-महर वो गजब ममहाय।
घूमे गाँव-शहर जस श्यामा।
का सखि,सजना?ना सखि,आमा।।
कोइली
गीत ओकर,मोर मन ल भाय।
गा-गा के वो मोला रिझाय।
गुरतुर लगे ओकर बोली।
का सखि,सजना?नहीं,कोइली।।
भँवरा
घूम-घूम के बंसी बजाय।
मोर मन ला गजब वो रिझाय।
निक लागय बजे जस तमूरा।
का सखि,सजना?ना सखि,भँवरा।।
तितली
बड़ निक लागय बगिया म आय।
एती-ओती बड़ मटमटाय।
धरे फिरय संग म दू सुपली।
का सखि,सजना?ना सखि,तितली।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
प्रकाशित दैनिक भास्कर 4/3/2019
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