चार अनमोल रतन
Subject: चार अनमोल रतन (प्रकाशित दावा )
(कुंडलियाँ)
"चार अनमोल रतन"
बेटी,तुलसी,पेड़,गउ, हावे जी अनमोल।
चारों के संसार मा, नइहे कोनों तोल।
नइहे कोनों तोल, सदा जी आदर देवौ।
राखव मया-दुलार, सदा हिरदे ले सेवौ।
चारों बिन बेकार, बिना पानी जस करसी।
रतन हरे अनमोल, पेड़,गउ,बेटी,तुलसी।।
भुइयाँ सुन्ना पेड़ बिन, तुलसी बिना दुवार।
कोठा सुन्ना गउ बिना, बेटी बिन संसार।
बेटी बिन संसार, कहाँ परिवार सँवरथे।
तुलसी बिना दुवार, कहाँ जी कभू उभरथे।
पीयव गउ के दूध, फायदा मिलथे दुन्ना।
मिलय नहीं जी छाँव, पेड़ बिन भुइयाँ सुन्ना।।
राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी(छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा RJN 2/5/2019
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