करम हर बोलथे

Subject: *हरिगीतिका*
करम हर बोलथे (प्रकाशित दावा 8/2/19 (हरिगीतिका)
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        करम हर बोलथे
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कर्तव्य करथे जेन हर,अधिकार वोला खोजथे।
पाथे सदा आदर उही,परहित सदा जे सोचथे।
सत्कर्म करथे जेन हर,किस्मत अपन वो खोलथे।
दौलत न बोलय जी कभू,जग मा करम हर बोलथे।।

विश्वास रखथे जेन हर,संसार मा वो जीतथे।
पाथे सदा जी फर उही सब,बीज जेहर सींचथे।
ज्ञानी सदा संसार मा सब लोग ले जी सीखथे।
होवय सफल ना मूर्ख हर,पर देख के जी खीझथे।।

मनखे नकारा हर सदा जी नाँव कुल के बोरथे।
जब देखथे जी धन पराया,तीर ओकर लोरथे।
संसार मा जी नित उही हर,छाप खुद के छोड़थे।
हरदम जगत मा जेन हर,बगरे सबो ला जोड़थे।।

       राम कुमार चन्द्रवंशी
       बेलरगोंदी (छुरिया)
       जिला-राजनांदगाँव
       9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा Rjn 8/2/2019

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