सियनहा गोठ

मदिरा सवैया 7×भगण 211+2

           सियनहा गोठ
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घाम लगे न पियास लगे,रतिहा दिन ना बरसात लगे। 

मेहनती मनखे ल कभू,उजड़े बगिया न सजात लगे। 

लाख सकेल रखे पुरखा,भकला ल कभू न गँवात लगे। 

कारज के घटकार ल जी,नित देर न बात बनात लगे।।

निर्लज ला फटकार लगा,कतको समझा नइ बात लगे। 

लालच जेकर अन्तस हे,जग मा नइ ठोकर खात लगे। 

क्रोध हरे अँगरा मन के,जिनगी ल न देर जलात लगे। 

अन्तस मा अभिमान रहे,तब देर न मान गँवात लगे।।

साँच कहे मनखे जब जी,तब लोगन ला पतियात लगे। 

काम अनीत करे तब जी,नइ बात कभू बगरात लगे। 

लाख कमा धन ला जग मा, जिनगी भर मान कमात लगे।
बात धरे कहलाय सुजानिक,मूरख ला समझात लगे।।

          राम कुमार चन्द्रवंशी
           बेलरगोंदी (छुरिया)
          जिला-राजनांदगाँव
           9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा 17/3/2019

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