गणतंत्र आगे

प्रकाशित दावा घनाक्षरी

            "गणतंत्र आ गे"
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उठो रात हा पहागे,दिन गणतंत्र आगे,
गाँव अउ सहर ला चलव सजाव जी।
देस-दुनिया हा देखे,हमर ले सब सीखे,
घर अँगना मा सब दीया ल जलाव जी।
गाँव लागे वृन्दावन,सहर अवध कस,
हँसी-खुशी गणतंत्र, चलव मनाव जी।
पुरखा के धरोहर,आवे देस ह हमर,
जुरमिल तिरंगा ला,चलो फहराव जी।।

देस आवे महतारी,वंश देस के निवासी,
राखो मत द्वेष संगी,पिरीत बढ़ाव जी।
जाति-धर्म के बैपारी,कटरत हावे भारी,
मन ला अपन कभू झन भटकाव जी।
बोली-भासा मा न बँटो, सुमत बनाये रखो,
बलिदानी पुरखा के जस ला सुनाव जी।
देस के बढ़ाओ सान,राखो हिरदे मा मान,
विश्वगुरु भारत ला फिर से बनाव जी।।

         राम कुमार चन्द्रवंशी
         बेलरगोंदी (छुरिया)
          जिला-राजनांदगाँव
         9179798316
प्रकाशित दैनिक दावा राजनांदगाँव 26/01/2019

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